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Showing posts from May, 2016
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 माँ कैसे करू शुक्रिया तुम्हे, दुनिया जो तुमने दिखाई है, माँ तू कितनी भोली,इतनी प्यारी मेरी कमियों को प्यार से ढकते आई है । पापा ने जब भी बेंत उठाया तुमने ही लड़ी मेरी लड़ाई है इतना प्यार , मोह का पिटारा माँ तू कहा से लायी है? माँ तू कितनी भोली,इतनी प्यारी तू ही मेरी ज़िन्दगी, तू ही पूरी कमाई है। कैसे करू शुक्रिया तुम्हे, मुझे ऊँगली पकड़ चलना जो  सिखाया है रहो में जब भी पड़ा अकेला, नज़रो ने बस तुम्हे ही पाया है एक कदम ना चला तेरे   बिन तेरे बिना चलना भी नगवारा है माँ , एक तू ही तो मेरा सहारा है! डाटा भी , मारा भी , ममता का रस भी बहाया है खुद पढ़ पढ़ के माँ , तूने मुझे पढ़ना सिखाया है, सारे संस्कार दिए तुमने ही मुझे माँ, रिश्ते निभाना भी तो तुमने  ही सिखाया है! कैसे करू शुक्रिया तुम्हे माँ , उस थाली के खाने से , भूख लगी भी हो तुम्हे जो, पर, पहला निवाला मुझे ही खिलाया है थोड़े से बुखार में जगी सारी रात मेरे खातिर तुम्हे पाकर माँ मैंने, साक्षात् भगवान को पाया है टीचर, डॉक्टर, कौंसलर और न जाने क्या क्या सब का किरदार माँ तुमने निभाया...