Posts

Showing posts from June, 2018

बस्ता

Image
एक फटे पुराने बस्ते से यादों की किताबें मिली है, धूलों की चादर में लिपटे , पन्नो में एक अजीब सी नमी है, दिन गुज़र गए कितने , और जज़्बाती इन जालों में अब वो पल भी तो नही है, लिखा पढ़ा धुंधला सा है अब और वो चिठ्ठी भी गुम कही है, पर कुतरा हुआ सा वो मैला सा बस्ता, फटा चिथड़ा ही सही, आज भी वहीं है, जैसे वक्त वो तेरा- मेरा मानो यही कहीं है। एक फटे पुराने बस्ते से यादों की किताबें मिली हैं -ताबिर- 5/6/18 अनुभव मिश्रा