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साहेब का फरमान

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फरमान जारी हुआ है, साहेब का संदेशा आया है अभी की बात नही है , सालों से चलता आया है कोशिश तो तब गोरों ने भी की ही थी ना साहेब, ज़ोर तुम भी लगा लो, आज  वर्गीकरण भी करा लो, पर सरजमीं ए हिंदुस्तान पे रंग विशेष नही, यही तिरंगा  लहराया है! . . भाई चारा नैसर्गिक है हम में , ये ईष्या कही औऱ की है सोचते गर मसल दोगे साहेब दीमक की तरह, वो कहानी अब किसी अलग दौर की है, लहू में ये एक जुनून हैं, आइंन पे जो आज मंडराता साया है, कागज़ के टुकड़ों पे हिंदुस्तान भला कहाँ कभी समा पाया है! . . सरकारी गलियारों से खबर चली है, कोई सियासी चाणक्य सा आया है, खजाना पूरा अस्त व्यस्त है, राग जुमला वो लाया है अर्रे कह दो इन हुक्मरानों को , बहरे इन कानो को, आज साहेब से लड़ने का बीड़ा हर एक युवा ने उठाया है, . . फरमान जारी हुआ है, साहेब का संदेशा आया है अभी की बात नही है , सालों से चलता आया है अनुभव मिश्रा 'ताबीर' 🇮🇳 22/12/19 #politics #protest  #constitution #poetry #taabirspeaks #taabiर

कौन हो तुम?

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कौन हो तुम सर्द बाजार में? जनवरी की ठंड से रुबरू, घने कोहरे के कारोबार में, बदलते पारे से मुसलसल, इश्कियां इन इश्तेहार में, लाल कार्डिगन में तबस्सुम, मेरे ख्वाबों के रोज़गार में, दिल की सिलवटें सवारे, टक टकी लगाए इंतज़ार में सवेरे सवेरे  सुरमयी आंखों से, प्यार वाला स्वेटर बुनती, दूर खड़ी, कौन हो तुम? जन्नत हो या मोहब्बत या महज़बीं इकरार में, ये कौन हो तुम सर्द बाजार में? -अनुभव कुमार मिश्रा (ताबीर) Image :  123rf.com