कौन हो तुम?
कौन हो तुम सर्द बाजार में?
जनवरी की ठंड से रुबरू,
घने कोहरे के कारोबार में,
बदलते पारे से मुसलसल,
इश्कियां इन इश्तेहार में,
लाल कार्डिगन में तबस्सुम,
मेरे ख्वाबों के रोज़गार में,
दिल की सिलवटें सवारे,
टक टकी लगाए इंतज़ार में
सवेरे सवेरे सुरमयी आंखों से,
प्यार वाला स्वेटर बुनती,
दूर खड़ी, कौन हो तुम?
जन्नत हो या मोहब्बत
या महज़बीं इकरार में,
ये कौन हो तुम सर्द बाजार में?
-अनुभव कुमार मिश्रा
(ताबीर)
Image :
123rf.com
जनवरी की ठंड से रुबरू,
घने कोहरे के कारोबार में,
बदलते पारे से मुसलसल,
इश्कियां इन इश्तेहार में,
लाल कार्डिगन में तबस्सुम,
मेरे ख्वाबों के रोज़गार में,
दिल की सिलवटें सवारे,
टक टकी लगाए इंतज़ार में
सवेरे सवेरे सुरमयी आंखों से,
प्यार वाला स्वेटर बुनती,
दूर खड़ी, कौन हो तुम?
जन्नत हो या मोहब्बत
या महज़बीं इकरार में,
ये कौन हो तुम सर्द बाजार में?
-अनुभव कुमार मिश्रा
(ताबीर)
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