अभी बहुत आग है बाकी

"अभी बहुत आग है बाकी"

भारत तेरी आँखों में जाने ये कैसा पानी है,
पीडा इतनी माँ , जान हुई हैरानी है ।
तू क्यों  समझती  नहीं  है तेरा कोई साथी ,
एक आवाज़ तो दे माँ ,  अभी बहुत आग है बाकि ।

चीर हरण , खून खराबा और  भ्रष्टाचार का साया ,
गोरो के काल से यही  तो चलता आया
 आज़ादी के बाद हमने अबतक क्या पाया?
पहले गोरो   ने अब हमने माँ  को बस यु ही रुलाया ।

प्रण  कर आज , नम हो न ये आँखें कदापि ,
बदलेंगे हम ,बदलेगा  भारत
अभी बहुत आग   है बाकि , अभी बहुत आग   है बाकि।


आज़ादी के मतवालो जैसे  हम भी जंग पे जाएंगे
 बुराइयो को नष्ट कर एक बेहतर समाज बनाएँगे
माँ की आज़ादी के लिए कुर्बान तो हो सके ,
माँ के आसु को ही पोंछ कर , एक नया उजियारा लाएंगे
एक नया उजियारा लाएंगे ।

ये करने को हमे  चाहिए कोई वर्दी या खाकी
ये करने को हम सब है काफी
अभी बहुत आग   है बाकि , अभी बहुत आग   है बाकि।

 जय हिन्द । 

Comments

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  2. एक आवाज़ तो दे माँ , अभी बहुत आग है बाकि ।
    this line pushed me go through whole poem. #like #awesome

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