माँ

कैसे करू शुक्रिया तुम्हे,
दुनिया जो तुमने दिखाई है,
माँ तू कितनी भोली,इतनी प्यारी
मेरी कमियों को प्यार से ढकते आई है ।

पापा ने जब भी बेंत उठाया
तुमने ही लड़ी मेरी लड़ाई है
इतना प्यार , मोह का पिटारा माँ तू कहा से लायी है?
माँ तू कितनी भोली,इतनी प्यारी
तू ही मेरी ज़िन्दगी, तू ही पूरी कमाई है।

कैसे करू शुक्रिया तुम्हे,
मुझे ऊँगली पकड़ चलना जो  सिखाया है
रहो में जब भी पड़ा अकेला,
नज़रो ने बस तुम्हे ही पाया है
एक कदम ना चला तेरे   बिन
तेरे बिना चलना भी नगवारा है
माँ , एक तू ही तो मेरा सहारा है!

डाटा भी , मारा भी , ममता का रस भी बहाया है
खुद पढ़ पढ़ के माँ , तूने मुझे पढ़ना सिखाया है,
सारे संस्कार दिए तुमने ही मुझे माँ,
रिश्ते निभाना भी तो तुमने  ही सिखाया है!

कैसे करू शुक्रिया तुम्हे माँ ,
उस थाली के खाने से , भूख लगी भी हो तुम्हे जो,
पर, पहला निवाला मुझे ही खिलाया है
थोड़े से बुखार में जगी सारी रात मेरे खातिर
तुम्हे पाकर माँ मैंने, साक्षात् भगवान को पाया है

टीचर, डॉक्टर, कौंसलर और न जाने क्या क्या
सब का किरदार माँ तुमने निभाया है
कभी दोस्त ,कभी प्यार तो कभी सख्त बनकर
माँ, मेरा जीवन तुने ही सवारा  है
तू ही मेरी दुनिया माँ , तू ही ज़िन्दगी जीने का सहारा  है

प्यार किया मैंने भी माँ तुझे,
पर शायद कभी जाता ना पाया
माँ मैंने तुम्हे कितना सताया ,
कितना सताया

माँ, मम्मी या मॉम , कहता तुझे ज़माना है
एक नाम माँ की खूबियों को कहा समेट पाया है
तू वो फल वाला पेड़ माँ,  जिसने छाया देकर
 चिलचिलाती   धुप से बचाया है
ज़िन्दगी की हर लड़ाई जीतना सिखाया

कैसे करू शुक्रिया तुम्हे माँ
खोटा सिक्का होता तेरे बिना
तुमने ही मुझे निखारा  है
मेरी शरारतो को अनदेखा कर, तो कभी साथ उसमे भी निभाया है
मेरे संग हरदम चला तेरा साया है ।

शब्दों में बया ही नहीं कर सकता
बस इतना समझ आया है
माँ तू कितनी भोली, इतनी प्यारी
तू ही मेरी दुनिया , तू ही मेरा रब है
तू नहीं तो  कुछ नहीं
संग तू है तो सब है
तो सब है ।

कैसे करू शुक्रिया तुम्हे माँ:)


अनुभव कुमार मिश्र
13 जून 2013


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