सोचा न था

एक दिन दुनिया मेरी पलट जाएगी
एक दिन तक़दीर मेरी कुछ यूँ बदल जाएगी
की जेवन के सफ़र में मुस्कराहट आएगी
सच करने का जूनून होगा सपना
कुछ उसका, कुछ अपना
ऐसा सोचा न था|

दांव वो लगाएगी जीत मैं जाऊंगा,
वो कदम से कदम मिलाएगी और मैं हर गम को हराऊंगा
सांसे तो थी पर उसके आते ही जीना सिख जाऊंगा
उसकी जीत पर मैं यूँ इतराउंगा
ऐसा सोचा न था

मेरी उम्मीदों को नयी उड़ान मिल जाएगी
उसकी नज़रो में मेरी दुनिया समाएगी
यूँ नाम के साथ सपने भी एक हो जाएंगे
और इरादे उसके आने से ऐसे नेक हो जाएगे
सोचा न था|

एक दिन दुनिया मेरी पलट जाएगी
एक दिन तकदीर मेरी कुछ यूँ बदल जाएगी
ऐसा सोचा न था

अनुभव कुमार मिश्र
'ताबीर'
24/12/2016

Comments

Popular posts from this blog

साहेब का फरमान

कौन हो तुम?

वो स्कूल का एक अफसाना