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Showing posts from 2017

एक है हर इंसान

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एक ने पहनी टोपी हुई, एक पे टीके का निशान, एक के तन पे सूट बूट है एक की पगड़ी है शान! एक के दिल में मूरत है, एक के दिल में हैं रहमान, एक का दिल है गिरजाघर में, एक के दिल में गुरु महान। रंग ढंग और रहन सहन सबका अलग अपना अभिमान क्यों तू कहती एक हैं सब माँ, हूँ मैं बड़ी हैरान! जब जात पात और धर्म के नाम पर मरता हर पल  हर इंसान, सहिष्णुता और अंखडता नही अब, सरोकार भी नदारद है, ये धर्म ही सबका,  धर्म ही सबका कारक है। हस कर मुकुरकर, थोड़ा यूँ ही गुदगुदा कर, ममता ने पगली को समझाया, सिर्फ दस बसंत हुए तुझे अभी तो, शतकों तक ये गुत्थी न कोई सुलझा पाया, एक कि टोपी दिखी यूँ सभी को, एक का दिखा निशान, एक के सूट को सबने ताडा, एक को पगड़ी का मान! एक ही तो है हर इंसान जिसकी बोली भी एक सी, रंग भी एक और एक ही भारत का गुमान! रक्त एक है, धर्म एक है, एक ही है भगवान, एक सा दिल है, एक सी बोली एक ही तो है मुस्कान, हिन्दू हो, सिख हो या हो ईसाई,या हो ही ना क्यों भाई मुसलमान! ~ताबिर~ 21 नवम्बर 2017

नियति को ये मंज़ूर नही

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नियति को ये मंज़ूर नही दो दिलो का ये कसूर नही जोशीले तन और मन से उन्होंने , संग सांसो के वादे खाये थे छोड़ कही उस तन्हाई को, संग जीत के गोते लगाए थे अंधियारे से उजियारे तक, खुशियो के हर एक गलियारे तक प्यार व्यार ही फैलाये थे! प्रेम के वो प्रचारक थे, तेरे मेरे सुधारक थे, जिस सदी में जिस्म का मोल नही, वो राधा कृष्ण कहलाये थे! पर भूल गए एक सत्य को वो भी पर भूल गए एक सत्य को वो भी, की कृष्णा राधा के कभी हुए नही मन तो एक ही था, तन कभी एक हुए नही ! उस समय भी नियति जीती थी उसपे किसी का जोर नही, नियति को ये मंज़ूर नही, दो दिलो का ये कसूर नही ~ताबीर~ 3 - नवंबर - 2017

चाँद मोहब्बत का

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कुदरत की खूबसूरत नक्काशी, पैगाम मोहब्बत का दिलो को जोड़ता लंदन से काशी, ये चाँद मोहब्बत का सितारों के जगमगाहट के बीच , वो मूरत इबादत का, जीवन के सुकून का जनक, ये चांद मोहब्बत का कसमो वादों का साक्षी, सजन के बाहो में लिपटा वो चांद इज़्ज़त का, जहां का साथी, बच्चो का मामा प्रिये का, ये चाँद मोहब्बत बदलो में शर्मिला, रोशनी का किला और चांदनी की छटा बिखेरती जादू, खूबसूरती ऐसे , जैसे महकशी बेकाबू प्यार की राह चलना सिखाता, ये चाँद मोहब्बत का। ~ताबीर~ 18 अप्रैल 2014

The Joy of Pain

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Everything is not alright Everything is not same Everything is in crisis I am enjoying the joy of pain That embracing smile is gone That pure heart seems lost That one night changed the game, That soul is no longer same Oh , I am enjoying the joy of pain That mind is numb That memory is never going to regain The present is bleak That future will be in vain Was that one night just not sane? Oh, I am enjoying the joy of pain That understanding is vanished That love been fading Why I did this to me? Yes I am insane. I am enjoying the joy of pain Everything is not alright Every thing is not same All I got to cheerish as memory of love is, The little Joy of pain. -Anubhav Kumar Mishra 31/5/17 Taabir

ख्वाब

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एक ख्वाब  का पीछा  करना था , एक जुनून की कहानी थी, सिरहाने उम्मीदों का सागर , हर रात बड़ी गुमानी थी  | नज़रो के  सैलाब में जो सो गया ये हलचल बड़ी तूफानी थी ये नज़र अब ख्वाब जो बन गए हर रात बड़ी रूमानी थी ये जो निशा में इनका मिलान हुआ इस गठजोड़ को नज़ीर बन जानी  थी पर तूफ़ान लाता तबाही ये ना फिर कोई अलग कहानी थी वो  जो नज़र का  धोका होता है इन ख्वाबो ने पहचानी थी अब ना वो जुनून था , ना उम्मीद , ना वो नज़र और अब ना ही वो ख्वाब गुमानी  थी एक ख्वाब  का पीछा  करना था अनुभव कुमार मिश्र 'ताबीर' 20/04/2017