वो स्कूल का एक अफसाना

वो नज़र चुराना ,वो नज़र मिलाना
वो स्कूल का अफ़साना

तड़पते दिल से मिलने को
सुबह क्लास जल्दी से आना,
और उसकी नोटबुक में
एक प्यारी चिट्ठी छोड़ जाना,
कॉरिडोर से निकले जब वो दोस्तो संग
मेरे साथियो का यूँ गुदगुदाना
जैसे हो एक नया फसाना,

उसके गिरे रुमाल को फिर धीरे से चुराना
रुमाल का फिर इश्क़ ए पोशाक बनाना,
यूँ ज़ुल्फो की हरकतों में खो के
सोडियम को वाटर में मिलाना,
खिलखिलाती हसी में उसकी,
शेक्सपियर और पैथगोरस की केमिस्ट्री बनाना,
सुरमयी आंखों की गहराई में
फिर पुलि के सहारे उतर जाना,
 पिछले पन्ने पे पढ़ नाम एक संग
दिल की धड़कन का यूँ बढ़ जाना ,
उफ्फ मेरा वो शर्माना

फिर क्वेश्चन के बहाने मिलना
और उसके हाय से डर जाना
वापस जाने को पैदल संग संग
खुद की साइकिल पंचर कर जाना,
गुज़रे जब मुहल्ले से उसके
मिलने को ट्यूशन के बहाने,
शरीर का यूँ थार्थराना और कपकपाना,

दीदार ए सूरत हो रात में
यूँ सपनो में संग उसके बड़बड़ाना,
शुक्राल्लाह , कल फिर से स्कूल है
वरना तय था मेरा मर जाना।


फिर से वही नज़रे चुराना , वही नज़रे मिलाना!
वही स्कूल का एक अफसाना।

~ताबिर~
30/01/2018



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